बनारस स्टेट की गद्दी, नदेसर पैलेस और रामनगर किला समेत संपत्तियों के अधिकार का मामला; 2011 से चल रहा है कानूनी विवाद
वाराणसी। काशी के राजपरिवार से जुड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों के अधिकार को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सोमवार को अहम मोड़ आया। रामनगर किला, बनारस स्टेट की गद्दी, नदेसर पैलेस समेत अन्य संपत्तियों से जुड़े विवाद में सिविल जज द्वितीय (वरिष्ठ खंड) नेहा सिंह की अदालत ने विष्णु प्रिया की ओर से दाखिल अर्जी को खारिज कर दिया। यह अर्जी मूल मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त करने के लिए दाखिल की गई थी।
अदालत में दोनों पक्षों की ओर से रखी गई दलीलों, दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों पर सुनवाई के बाद अर्जी निरस्त कर दी गई। इसके साथ ही अब संपत्तियों के अधिकार और उत्तराधिकार से जुड़े मूल वाद की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
2011 में शुरू हुई थी संपत्तियों के अधिकार की कानूनी लड़ाई
मामले की जड़ वर्ष 2011 में दाखिल किए गए उस मूल वाद से जुड़ी है, जिसे पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह के पुत्र अनंत नारायण सिंह की ओर से अदालत में दाखिल किया गया था। वाद में अनंत नारायण सिंह ने स्वयं को दिवंगत महाराज का ज्येष्ठ पुत्र बताते हुए बनारस स्टेट, रामनगर किला समेत अन्य संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा किया है।
मूल वाद में विष्णु प्रिया समेत अन्य लोगों को रामनगर किला से बेदखल किए जाने की मांग की गई है। इसके साथ ही स्थायी निषेधाज्ञा और क्षतिपूर्ति की मांग भी वाद में शामिल है।

यानी विवाद केवल किसी एक संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि काशी राजपरिवार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण संपत्तियों के अधिकार और उत्तराधिकार के सवाल से जुड़ा हुआ है।
विष्णु प्रिया ने 2025 में उठाया था कानूनी सवाल
मामले में विष्णु प्रिया की ओर से वर्ष 2025 में अर्जी दाखिल की गई थी। इस अर्जी में अदालत से अनुरोध किया गया था कि मूल मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया जाए।
अपनी दलील के समर्थन में विष्णु प्रिया की ओर से हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधानों और विभिन्न संवैधानिक एवं न्यायिक नजीरों का हवाला दिया गया। उनका तर्क था कि वह भी पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह की पुत्री हैं। ऐसे में संबंधित संपत्तियों में उनके अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विष्णु प्रिया की ओर से यह भी कहा गया कि उत्तराधिकार से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत संपत्तियों पर उनके अधिकार का भी विचार किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने मुकदमे की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए उसे शुरुआती चरण में ही समाप्त करने की मांग की थी।
अनंत नारायण सिंह की ओर से अर्जी का विरोध
विष्णु प्रिया की अर्जी का अनंत नारायण सिंह की ओर से विरोध किया गया। उनकी ओर से संपत्तियों के अधिकार और मूल वाद की पोषणीयता को लेकर अदालत के सामने अपनी दलीलें रखी गईं।
सुनवाई के दौरान 9 सितंबर 1949 को भारत सरकार के साथ हुए विलय समझौते का भी हवाला दिया गया। पक्ष की ओर से संपत्तियों से जुड़े अधिकारों और मामले की कानूनी स्थिति के संबंध में विभिन्न तथ्य एवं दस्तावेज अदालत के समक्ष रखे गए।

अनंत नारायण सिंह की ओर से दाखिल वर्ष 2011 के मूल वाद में स्वयं को पूर्व काशी नरेश का ज्येष्ठ पुत्र बताते हुए संपत्तियों पर अधिकार का दावा किया गया है। इसी दावे के आधार पर रामनगर किला समेत अन्य संपत्तियों को लेकर पक्षकारों के बीच लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है।
अदालत में दोनों पक्षों ने रखे अपने-अपने तर्क
सोमवार की सुनवाई में विष्णु प्रिया की अर्जी पर दोनों पक्षों की ओर से विस्तार से दलीलें रखी गईं। कानूनी प्रावधानों, न्यायिक नजीरों और संबंधित दस्तावेजों को अदालत के सामने रखा गया।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विष्णु प्रिया की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें मूल मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त करने की मांग की गई थी।
अर्जी खारिज होने का मतलब यह है कि मूल मुकदमा अभी जारी रहेगा। संपत्तियों पर अंतिम अधिकार किसका होगा, इसका फैसला इस स्तर पर नहीं हुआ है। अब मूल वाद में आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
अब 21 सितंबर को क्या होगा?
अदालत के आदेश के बाद मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की गई है। इस तारीख पर मूल वाद की आगे की कानूनी प्रक्रिया बढ़ेगी।
विष्णु प्रिया की अर्जी खारिज होने से फिलहाल मुकदमे को शुरुआती स्तर पर खत्म करने की उनकी मांग पर विराम लग गया है। हालांकि, रामनगर किला, बनारस स्टेट और अन्य संपत्तियों के अंतिम अधिकार को लेकर मूल विवाद अभी अदालत में विचाराधीन है।
काशी के राजपरिवार की विरासत से जुड़ा है मामला
रामनगर किला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि काशी के राजपरिवार और बनारस स्टेट के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसी वजह से इससे जुड़ा यह कानूनी विवाद भी लंबे समय से लोगों की नजर में है।

पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह के निधन के बाद उनकी संपत्तियों के उत्तराधिकार, स्वामित्व और अधिकार को लेकर अलग-अलग स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। मौजूदा मुकदमे में भी यही सवाल कानूनी बहस के केंद्र में हैं कि संबंधित संपत्तियों पर किसका अधिकार बनता है और उत्तराधिकार के मौजूदा कानून इन संपत्तियों पर किस तरह लागू होते हैं।
फिलहाल अदालत ने विष्णु प्रिया की अर्जी को खारिज कर दिया है, लेकिन इससे रामनगर किला और बनारस स्टेट की संपत्तियों का अंतिम स्वामित्व तय नहीं हुआ है। अब सबकी निगाहें 21 सितंबर की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मूल वाद की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
