रिपोर्ट – पवन आजाद

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व विशेष खगोलीय और धार्मिक संयोगों के बीच मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 15 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी। यद्यपि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9:39 बजे होगा, लेकिन सूर्यास्त के बाद संक्रांति होने के कारण इसका पुण्यकाल अगले दिन यानी 15 जनवरी की भोर से प्रभावी होगा।

75 वर्षों बाद बना विशेष संयोग

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुभाष पांडेय के अनुसार, इस वर्ष मकर संक्रांति पर तीन शुभ योगों की युति बन रही है, जो इसे अत्यंत फलदायी बनाती है। लगभग 75 वर्षों के अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जब मकर संक्रांति के दिन ही ‘तिल द्वादशी’ और ‘वृद्धि योग’ का मिलन हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति माघ कृष्ण द्वादशी को हुई थी, अतः इस दिन तिल का दान और सेवन कई गुना अधिक पुण्य प्रदान करेगा।

गुरुवार की वर्जना नहीं होगी प्रभावी

एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए प्रो. पांडेय ने बताया कि सामान्यतः कई लोग गुरुवार को खिचड़ी खाने से परहेज करते हैं, लेकिन चूंकि इस बार पर्व ही गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए गुरुवासरीय वर्जना (निषेध) प्रभावी नहीं होगी। श्रद्धालु निस्संकोच भाव से खिचड़ी का सेवन, निर्माण और दान कर सकते हैं।

शास्त्रों का मत: क्यों 15 को मकर संक्रांति?

श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री एवं बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि सूर्य सिद्धांत के अनुसार जब मकर संक्रांति रात्रि में होती है, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन के 16 घंटों तक विस्तारित रहता है। इसी आधार पर 15 जनवरी को सूर्योदय से लेकर दोपहर 1:39 बजे तक विशेष पुण्यकाल रहेगा। इसी अवधि में पवित्र नदियों में स्नान, जप और दान का विधान है।

दान का महत्व और परंपरा

उत्तर प्रदेश और विशेषकर काशी में मकर संक्रांति को ‘दान का पर्व’ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु गंगा में मौन स्नान कर तिल, गुड़, खिचड़ी, अन्न और गर्म वस्त्रों का दान करते हैं। संक्रांति से ही खरमास समाप्त होगा और विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।

क्या दान करें?

* तिल और गुड़

* दाल-चावल की खिचड़ी

* गर्म वस्त्र (कंबल आदि)

* अन्न और घी

इस महापर्व को लेकर काशी के घाटों पर प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं, क्योंकि 15 जनवरी की भोर से ही लाखों श्रद्धालुओं के गंगा स्नान के लिए उमड़ने की संभावना है।

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