रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। समाचार सेवा मानवता और संवेदनशीलता की एक मिसाल पेश करते हुए, वाराणसी में 6 वर्षीय बालक श्रेयांश की ‘एक दिन का पुलिस अधिकारी’ बनने की इच्छा पूरी की गई। मेक-अ-विश फाउंडेशन ऑफ इंडिया की इस विशेष पहल ने गंभीर बीमारी से जूझ रहे श्रेयांश के जीवन में खुशियों के रंग भर दिए।
पुलिस कमिश्नर के आदेश पर हुआ भव्य आयोजन
यह कार्यक्रम पुलिस आयुक्त श्री मोहित अग्रवाल के आदेशानुसार आयोजित किया गया। लंका थाना के प्रभारी निरीक्षक (SHO) राजकुमार सर के नेतृत्व में श्रेयांश को एक दिन के लिए IPS अधिकारी और ट्रैफिक इंचार्ज की मानद जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस स्टेशन पहुँचते ही श्रेयांश का स्वागत एक उच्चाधिकारी के समान सम्मान के साथ किया गया।

कविता के जरिए सिखाया ट्रैफिक का पाठ
वर्दी पहने आत्मविश्वास से लबरेज श्रेयांश ने न केवल यातायात व्यवस्था का निरीक्षण किया, बल्कि सड़क पर चल रहे लोगों को नियमों के प्रति जागरूक भी किया।
विशेष आकर्षण: श्रेयांश ने अपनी मासूम आवाज में एक कविता के माध्यम से लोगों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने की सीख दी, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल जीत लिया।
थाने की कार्यप्रणाली को करीब से देखा
अपने कार्यकाल के दौरान नन्हे अधिकारी ने पुलिस विभाग के विभिन्न अंगों का बारीकी से निरीक्षण किया:

शस्त्रागार (Armory): हथियारों और सुरक्षा उपकरणों की जानकारी ली।
हवालात (Lock-up): पुलिस की हिरासत प्रक्रिया को समझा।
विभागीय अवलोकन: SHO राजकुमार ने स्वयं गाइड बनकर उसे पुलिस की कार्यप्रणाली और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के बारे में बताया।
मेक-अ-विश टीम का सराहनीय योगदान
इस सपने को हकीकत में बदलने में मेक-अ-विश फाउंडेशन के वाराणसी चैप्टर की अहम भूमिका रही। इस दौरान चैप्टर मैनेजर भास्कर पाण्डेय, समन्वयक शिशिर आनंद सहित स्वयंसेवक अर्चा, साजन, यश, आशय, कीर्ति सिंह, अंशिका और हिमांशु उपस्थित रहे।
निष्कर्ष: समाज के लिए एक प्रेरणा
फाउंडेशन का उद्देश्य श्रेयांश जैसे बच्चों को मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना है। वाराणसी पुलिस और फाउंडेशन के इस साझा प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि संवेदनशीलता और छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। श्रेयांश के चेहरे की मुस्कान ने यह संदेश दिया कि सेवा ही
सबसे बड़ा धर्म है।

