रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। मार्च 2026 काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS) बुजुर्गों की सेहत सुधारने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। संस्थान में 200 बेड वाला अत्याधुनिक नेशनल सेंटर ऑफ एजिंग (NCA) अपने अंतिम निर्माण चरण में है। राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम (NPHCE) के तहत विकसित यह केंद्र अगले माह तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जिससे पूर्वांचल सहित आसपास के राज्यों के वृद्धजनों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
135 स्थायी पदों को मिली मंजूरी, उपकरणों की खरीद तेज
केंद्र के सुचारू संचालन के लिए बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मानव संसाधन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 135 स्थायी पदों (शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक) को अपनी स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही:
आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और फर्नीचर की खरीद प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ की नियुक्ति से जेरियाट्रिक मेडिसिन (वृद्धजन चिकित्सा) के क्षेत्र में अनुसंधान को नई गति मिलेगी।
जेरियाट्रिक केयर: क्यों खास है यह केंद्र?
यह केंद्र केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि वृद्धजनों की जटिल बीमारियों के लिए एक समग्र उपचार केंद्र होगा। इसके शुरू होने से निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:
विशेषज्ञ उपचार: वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों (जैसे अल्जाइमर, पार्किंसंस और हड्डियों की कमजोरी) का सटीक इलाज।
पुनर्वास सेवाएँ: सर्जरी या लंबी बीमारी के बाद बुजुर्गों को फिर से आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष परामर्श।
शैक्षणिक विस्तार: जेरियाट्रिक मेडिसिन में शोध और नए डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए एक मॉडल सेंटर।
“यह संस्थान के लिए गर्व का क्षण है। आईएमएस-बीएचयू सरकार के भरोसे को प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं और वृद्धजनों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में बदलने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” > — प्रो. अनुप सिंह, नोडल अधिकारी (NCA)
पूर्वांचल के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए यह केंद्र भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में मील का पत्थर साबित होगा। वाराणसी और आसपास के जिलों के लाखों बुजुर्गों को अब एक ही छत के नीचे विशेषज्ञ सलाह और आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध होगी।
यह परियोजना न केवल उपचार, बल्कि प्रशिक्षण, अनुसंधान और जागरूकता के क्षेत्र में भी देश के अन्य हिस्सों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनेगी।
