रिपोर्ट – पवन आजाद 

वाराणसी । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू) और इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज IMS-BHU के शोधकर्ताओं ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान की एक संयुक्त टीम ने गहरे जख्मों को तेजी से भरने और त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों (UV rays) से बचाने के लिए ‘प्रोटीन-मेथी आधारित बायोमैटेरियल’ विकसित किया है। यह तकनीक अब मानव क्लिनिकल ट्रायल की ओर बढ़ रही है।

प्रमुख विशेषताएं और लाभ

यह शोध परियोजना आईआईटी (बीएचयू) के डॉ. अवनीश सिंह परमार और आईएमएस के प्रो. वैभव जैन के नेतृत्व में पूरी हुई है। वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया यह नया जैव-पदार्थ कई मायनों में खास है:

तेजी से घाव भरना: यह मांसपेशियों के गहरे जख्मों में ऊतकों (tissues) के पुनर्जनन की प्रक्रिया को तेज करता है।

फोटो-प्रोटेक्शन: यह त्वचा को घातक अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों से सुरक्षा प्रदान करता है।

एंटीमाइक्रोबियल गुण: इसमें संक्रमण से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता है, जो घाव को सड़ने से बचाती है।

प्री-क्लिनिकल परीक्षण में मिली सफलता

इस नवाचार का परीक्षण चूहों और खरगोशों पर किया जा चुका है। परिणामों में पाया गया कि यह पूरी तरह से सुरक्षित (Biocompatible) है और इसका शरीर पर कोई विषाक्त प्रभाव नहीं पड़ता।

शोध के इन निष्कर्षों को अंतर्राष्ट्रीय जर्नल ‘ACS एप्लाइड बायोमैटेरियल्स’ और ‘कोलाइड्स एंड सर्फेस बी’ में भी स्थान मिला है।

स्टार्टअप के जरिए बाजार में लाने की तैयारी

संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस उपलब्धि को ‘ट्रांसलेशनल रिसर्च’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक जल्द ही आम जनता के लिए उपलब्ध होगी। इस दिशा में शोध टीम ने ‘प्रो-एमाइलॉइडोकेयर प्राइवेट लिमिटेड’ नामक स्टार्टअप भी शुरू किया है, जिसे आईआईटी (बीएचयू) फाउंडेशन और जेआईसी स्टार्टअप अवॉर्ड से आर्थिक सहयोग मिला है।

“यह शोध दर्शाता है कि हमारे वैज्ञानिक समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए प्रकृति-प्रेरित नवाचार पर केंद्रित हैं। अब इसे सीडीएससीओ (CDSCO) के पास क्लिनिकल परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।”

प्रो. अमित पात्रा, निदेशक, आईआईटी (बीएचयू)

युवा शोधकर्ताओं का योगदान

इस महत्वपूर्ण खोज में शोधकर्ता सुश्री शिखा त्रिपाठी (PMRF फेलो) और डॉ. शिल्पी चौधरी (PEC चंडीगढ़) ने अहम भूमिका निभाई है। हाल ही में इस तकनीक को 20 जनवरी 2026 को आयोजित ‘यूपी हेल्थ टेक कॉन्क्लेव 1.0’ में भी प्रदर्शित किया गया था, जहाँ इसे काफी सराहना मिली।

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