रिपोर्ट – पवन आजाद

Gorkhapur News: महाकुंभ और माघ मेले में बच्चों के खोने की घटनाओं से सीख लेकर ITM गिडा, गोरखपुर की छात्राओं ने एक अनोखी ‘चिल्ड्रन सेफ्टी जैकेट’ तैयार की है। बीटेक थर्ड ईयर की छात्राएं शांभवी मिश्रा, आरुषि यादव और नंदिता कुमारी ने मिलकर इस जैकेट को डिजाइन किया है, जो बच्चों को ठंड से बचाने के साथ-साथ अपहरण और लापता होने से भी सुरक्षित रखेगी।

कैसे काम करता है यह जैकेट

यह नवाचार रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) टेक्नोलॉजी पर आधारित है। जैकेट में एक छोटा ट्रांसमीटर चिप लगा है और घर के मुख्य द्वार पर एक रिसीवर लगाया जाता है।

अलर्ट सिस्टम : जैसे ही बच्चा खेलते-खेलते घर के गेट के पास पहुंचता है, रिसीवर सिग्नल कैच कर लेता है और घर के अंदर लगा अलार्म बजने लगता है।

फायदा : इससे माता-पिता समय रहते सतर्क हो जाएंगे और बच्चों को घर से बाहर जाने या किसी अनजान व्यक्ति के साथ जाने से रोक सकेंगे।

जाने कितने कीमत में होगी जान की सुरक्षा

छात्राओं ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 60 हजार बच्चे लापता होते हैं। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए उन्होंने बताया कि ₹500- 700 की लागत में यह स्वदेशी समाधान निकाला है। इस डिवाइस को बनाने में रेडियो चिप, 3 वोल्ट की बटन बैटरी और रिसीवर का उपयोग किया गया है।

ITM गिडा के निदेशक डॉ. एन. के. सिंह ने बताया कि छात्राओं का यह स्वदेशी नवाचार छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। संस्थान इस प्रोजेक्ट को स्टार्टअप के जरिए बाजार में लाने के लिए हर संभव मदद करेगा।

 

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