Oplus_131072

रिपोर्ट – पवन आजाद

 

वाराणसी। धर्मनगरी काशी के विश्वप्रसिद्ध अस्सी घाट पर गंगा आरती देखने पहुंचे महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं के एक समूह ने वसूली और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि आरती देखने के लिए उनसे कुर्सी के नाम पर 100 से 200 रुपये तक की मांग की गई और पैसे न देने पर उन्हें वहां से हटाया गया। इस घटना से श्रद्धालुओं में नाराजगी और निराशा का माहौल है।

30 श्रद्धालुओं का समूह, हजारों किलोमीटर दूर से पहुंचे थे काशी

जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र से करीब 30 श्रद्धालुओं का एक दल वाराणसी दर्शन और गंगा आरती में शामिल होने के उद्देश्य से काशी पहुंचा था। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे लंबी दूरी तय कर श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ यहां आए थे, लेकिन घाट पर उनके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उसने उनकी धार्मिक यात्रा के अनुभव को खराब कर दिया।

श्रद्धालुओं ने बताया कि काशी आने का उनका मुख्य उद्देश्य गंगा आरती का दिव्य दर्शन करना था, जिसे वे वर्षों से देखने की इच्छा रखते थे।

सीढ़ियों पर बैठकर आरती देखने से भी रोका गया

श्रद्धालुओं का आरोप है कि जब उन्होंने कुर्सी के लिए पैसे देने से इनकार किया, तो उन्हें घाट की सीढ़ियों पर बैठकर आरती देखने की अनुमति भी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्वक सीढ़ियों पर बैठकर आरती देखना चाहते थे, लेकिन वहां मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें वहां से उठने के लिए मजबूर किया।

इस व्यवहार से श्रद्धालु स्वयं को अपमानित और आहत महसूस कर रहे हैं।

बिना रसीद पैसे लेने और डराने-धमकाने का आरोप

श्रद्धालुओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों से कुर्सी उपलब्ध कराने के नाम पर नकद पैसे लिए गए, लेकिन बदले में कोई रसीद नहीं दी गई। उनका कहना है कि पैसे मांगने के दौरान कुछ लोगों का व्यवहार आक्रामक और डराने-धमकाने जैसा था, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

श्रद्धालुओं का कहना है कि इस तरह की अव्यवस्था और अनियमितता से श्रद्धालुओं के मन में असुरक्षा और असंतोष की भावना पैदा होती है।

आस्था के साथ खिलवाड़ का आरोप, प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने इस घटना को आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे काशी की धार्मिक छवि और श्रद्धालुओं का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

श्रद्धालुओं ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि घाटों पर व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए और किसी भी प्रकार की वसूली के लिए स्पष्ट नियम और रसीद प्रणाली लागू की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी श्रद्धालु को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *