रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्गों में शुमार लंका थाना से बीएचयू ट्रामा सेंटर मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। विकास कार्यों के नाम पर हो रही बार-बार की खुदाई ने इस सड़क को गड्ढों के मलबे में तब्दील कर दिया है, जिससे मरीजों, छात्रों और स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।

हर 10 दिन में खुद रही सड़क: ‘नियोजन’ की भारी कमी
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले दो महीनों से इस सड़क को मजाक बना दिया गया है। हर 10 दिनों के अंतराल पर मार्ग को खोद दिया जाता है। ताज्जुब की बात यह है कि सड़क निर्माण कार्य पूरा होने के महज कुछ ही दिनों बाद फिर से खुदाई शुरू कर दी गई। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली से सरकारी धन की बंदरबांट और बर्बादी को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है।
मरीजों और एंबुलेंस के लिए बनी ‘डेथ ट्रैप’
यह मार्ग बीएचयू ट्रामा सेंटर को जोड़ता है, जहाँ रोजाना सैकड़ों गंभीर मरीज पहुंचते हैं।
जाम का झाम: गड्ढों के कारण एंबुलेंस घंटों जाम में फंस रही हैं, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है।
खतरनाक सफर: तीमारदारों और एंबुलेंस चालकों का कहना है कि उबड़-खाबड़ रास्ते के कारण झटकों से मरीजों की स्थिति और बिगड़ जाती है।
मासूमों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
सड़क किनारे कई छोटे बच्चों के विद्यालय स्थित हैं। स्कूल खुलने के बाद बच्चों और अभिभावकों का आवागमन बढ़ गया है, लेकिन खुले गड्ढे किसी बड़ी दुर्घटना को दावत दे रहे हैं।
धूल के गुबार से बीमारियों का खतरा
खुदाई के बाद छोड़ी गई मिट्टी से पूरा इलाका धूल के आगोश में है:
सेहत पर वार: उड़ती धूल से स्थानीय लोगों और दुकानदारों को सांस संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ गया है।
खाद्य पदार्थ दूषित: सड़क किनारे बिकने वाले खाने-पीने के सामान पर धूल की परत जम रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों का डर है।
स्थानीय लोगों की मांग: “एक बार में हो काम”
क्षुब्ध नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय (Coordination) स्थापित करें। पहले पाइपलाइन, केबल और अन्य भूमिगत कार्य पूरे किए जाएं, उसके बाद ही सड़क बनाई जाए ताकि बार-बार खुदाई की नौबत न आए। “क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? सड़क बनती है और अगले ही हफ्ते फिर खोद दी जाती है। यह जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और हमारी जान से खिलवाड़ है।” एक आक्रोशित स्थानीय नागरिक
