रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की प्रतिष्ठित ‘साइबर लाइब्रेरी’ पिछले चार महीनों से बदहाली का शिकार है। लाइब्रेरी के फर्स्ट फ्लोर पर हुए शॉर्ट सर्किट और आगजनी की घटना के बाद से ही छात्रों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित अनदेखी से नाराज छात्रों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

तकनीकी खराबी और प्रशासन की सुस्ती
छात्रों का आरोप है कि बीते 4 महीनों पहले लाइब्रेरी के प्रथम तल पर तकनीकी खामियों के चलते शॉर्ट सर्किट हुआ था, जिससे वहां आग लग गई थी। इस घटना के बाद से लाइब्रेरी का वह हिस्सा बंद पड़ा है। छात्रों का कहना है कि इतना लंबा समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन ने मरम्मत का कार्य शुरू नहीं कराया है, जिसके कारण लाइब्रेरी अपनी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रही है।
सीटों की भारी किल्लत से जूझ रहे छात्र
लाइब्रेरी का एक हिस्सा बंद होने के कारण विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को बैठने की जगह नहीं मिल रही है।
सीटों की कमी: फर्स्ट फ्लोर बंद होने से उपलब्ध सीटों की संख्या आधी रह गई है।
परीक्षा का दबाव: विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं और सेमेस्टर परीक्षाओं के दौर में छात्रों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है या बिना पढ़ाई किए वापस लौटना पड़ रहा है।
छात्रों की मांग: जल्द खुले लाइब्रेरी, वरना होगा आंदोलन
बीएचयू के छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए मांग की है कि लाइब्रेरी की तकनीकी खामियों को तुरंत दूर कर इसे पूर्ण रूप से खोला जाए। छात्रों का कहना है कि यदि जल्द ही लाइब्रेरी को सुचारू रूप से संचालित नहीं किया गया, तो वे एक बड़े और व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
“प्रशासन की लापरवाही हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अगर समय रहते लाइब्रेरी ठीक नहीं हुई, तो छात्र सड़कों पर उतरेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी बीएचयू प्रशासन की होगी।” — विरोध कर रहे छात्र

