बारिश  में कच्चे घर गिरने के बाद झोपड़ी बनी सहारा, झोपड़ी के अंदर तक पहुंचा पानी; तहसील और अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद नहीं मिला आवास

वाराणसी। आराजी लाइन विकासखंड क्षेत्र की ग्राम सभा महमदपुर में नट समुदाय के कुछ परिवार इन दिनों बेहद मुश्किल हालात में जीवन गुजार रहे हैं। लगातार हो रही बारिश ने इन परिवारों की परेशानी और बढ़ा दी है। कच्चे मकान पहले ही बारिश की मार नहीं झेल सके और गिर गए। इसके बाद परिवारों ने किसी तरह झोपड़ी खड़ी कर उसमें रहने का इंतजाम किया, लेकिन लगातार बारिश के कारण अब झोपड़ी के अंदर भी पानी भर गया है। मजबूरी ऐसी है कि परिवार के लोग पानी से भरी झोपड़ी में ही रहने को विवश हैं।

फोर्थ पिलर की टीम बुधवार को महमदपुर गांव पहुंची और मौके पर परिवारों की स्थिति देखी। यहां परिवार के लोग झोपड़ी के अंदर जमा पानी को बाहर निकालते दिखाई दिए। बारिश से बचने के लिए बनाई गई झोपड़ी ही अब उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। झोपड़ी के अंदर पानी भरने के कारण घरेलू सामान और जरूरी चीजों को सुरक्षित रखना भी मुश्किल हो रहा है।

दो साल से आवास के लिए अधिकारियों के चक्कर

महमदपुर गांव की रहने वाली रसूलिया देवी, बदरुद्दीन, रानी देवी और सरिता देवी सहित अन्य परिवारों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। परिवार लंबे समय से झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो वर्षों से आवास की मांग को लेकर राजातालाब तहसील से लेकर संबंधित अधिकारियों के कार्यालय तक कई बार चक्कर लगाए जा चुके हैं।

नट समुदाय

परिवारों का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को अपनी स्थिति के बारे में बताया और आवास उपलब्ध कराने के लिए शिकायती पत्र भी दिए, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। हर बार उन्हें आश्वासन मिलने की बात कही गई, लेकिन पक्की छत का इंतजार खत्म नहीं हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी और सर्दी का मौसम किसी तरह गुजर जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही सबसे बड़ी समस्या सामने आती है। कच्चे घरों के गिरने के बाद परिवारों के पास झोपड़ी के अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं बचा है। अब बारिश का पानी झोपड़ी के अंदर पहुंचने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी योजनाओं के बीच उठ रहा सवाल

गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से आवास योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य ऐसे परिवारों को सुरक्षित छत उपलब्ध कराना है, जिनके पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। इसके बावजूद महमदपुर में कुछ परिवारों की स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर इन परिवारों को अब तक आवास का लाभ क्यों नहीं मिल सका।

परिवारों का कहना है कि यदि वे आवास के लिए पात्र हैं तो उन्हें योजना का लाभ मिलना चाहिए। वहीं, यदि किसी कारण से उन्हें आवास नहीं मिल पा रहा है तो संबंधित विभाग को उनकी समस्या स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि परिवार अपनी परेशानी का समाधान तलाश सकें।

ग्राम प्रधान ने बताई जमीन की समस्या

मामले को लेकर जब ग्राम प्रधान अनवर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लेखपाल की ओर से गांव में जांच की गई है। ग्राम प्रधान के अनुसार, ग्राम सभा में सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं है। जमीन उपलब्ध न होने की वजह से इन परिवारों को आवास दिलाने में परेशानी सामने आ रही है।

हालांकि, ग्रामीणों की परेशानी अभी भी बनी हुई है। उनका कहना है कि जमीन और आवास से जुड़ी समस्या का समाधान संबंधित अधिकारियों को करना चाहिए, क्योंकि बारिश के बीच परिवारों को खुले और असुरक्षित हालात में नहीं छोड़ा जा सकता।

नट समुदाय की झोपड़ी में पानी

जलभराव से बीमारी का भी खतरा

महमदपुर में सिर्फ आवास की समस्या ही नहीं है, बल्कि बारिश के बाद झोपड़ियों और आसपास जलभराव की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से गंदगी बढ़ने और मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है। ऐसे में परिवारों के सामने बीमारी का खतरा भी पैदा हो सकता है।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर परिवारों की वास्तविक स्थिति की जांच करे। यदि परिवार आवास के पात्र हैं तो उन्हें जल्द योजना का लाभ दिलाया जाए। साथ ही जब तक स्थायी आवास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक बारिश से बचाव और रहने के लिए जरूरी राहत उपलब्ध कराई जाए।

महमदपुर की तस्वीर ग्रामीण क्षेत्र में गरीब परिवारों के सामने मौजूद उस समस्या को सामने लाती है, जहां पक्की छत का इंतजार वर्षों से जारी है। एक ओर लगातार बारिश हो रही है और दूसरी ओर परिवार पानी भरी झोपड़ी में रात गुजारने को मजबूर हैं। अब देखना यह है कि इन परिवारों की शिकायतों पर जिम्मेदार विभाग कब कार्रवाई करता है और उन्हें सुरक्षित आवास कब उपलब्ध कराया जाता है।

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