वाराणसी। मिर्जामुराद थाना क्षेत्र स्थित पुराने आलू मिल के समीप शाम के समय संचालित होने वाली मछली मंडी एक बार फिर विवादों में है। स्थानीय लोगों ने मंडी के कई विक्रेताओं पर कम तौलकर मछली बेचने और विरोध करने पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि कुछ दुकानदार ग्राहकों को निर्धारित मात्रा से कम मछली दे रहे हैं। आरोप है कि एक किलो मछली खरीदने पर कई बार 100 से 200 ग्राम तक वजन कम निकलता है, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ग्राहकों के मुताबिक, जब इस संबंध में दुकानदारों से शिकायत की जाती है तो कुछ विक्रेता विवाद करने लगते हैं। कई मामलों में गाली-गलौज और धमकाने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं, जिसके कारण लोग खुलकर विरोध करने से बचते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडी में कम तौल की समस्या कोई नई नहीं है। यह मुद्दा लंबे समय से बना हुआ है, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण कर तौल मशीनों की जांच करे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करे।
उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मंडी में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, घटतौली पर अंकुश लगाने तथा शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि खरीदारों को पारदर्शी और सुरक्षित खरीदारी का माहौल मिल सके।
मामला मिर्जामुराद मछली मंडी में घटतौली का है।वाराणसी मछली बाजार, उपभोक्ता शिकायत, कम तौल का मामला
स्थानीय लोगों के अनुसार, मछली खरीदने आने वाले ग्राहकों को कई बार एक किलो के नाम पर कम मात्रा में मछली दी जाती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वजन की जांच करने पर 100 ग्राम से लेकर 200 ग्राम तक की कमी पाई जाती है। इससे ग्राहकों को बार-बार नुकसान उठाना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और कई उपभोक्ता इसकी शिकायत भी कर चुके हैं।
क्षेत्र के कुछ निवासियों ने बताया कि मंडी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मछली खरीदने पहुंचते हैं। ऐसे में यदि वजन में गड़बड़ी की जा रही है तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में लोग अपनी जरूरत के हिसाब से खरीदारी करते हैं, लेकिन कम तौल मिलने से उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जब ग्राहक कम तौल को लेकर सवाल उठाते हैं तो कुछ विक्रेता नाराज हो जाते हैं और बहस करने लगते हैं। कई बार स्थिति इतनी बढ़ जाती है कि गाली-गलौज और धक्का-मुक्की जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। इससे खासकर महिलाओं और बुजुर्ग ग्राहकों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि इस तरह का माहौल उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और इससे बाजार की साख भी प्रभावित होती है।
निवासियों के मुताबिक, यह समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से समय-समय पर ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो उपभोक्ताओं का भरोसा बाजार से उठ सकता है।
क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन, तौल-माप विभाग और संबंधित अधिकारियों से मंडी में नियमित निरीक्षण अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि सभी दुकानदारों की तौल मशीनों की जांच की जाए और यदि कहीं गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही मंडी में निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से सामान मिल सके।
