रिपोर्ट: गोपी गुप्ता
वाराणसी, 4 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन के उद्देश्य से संकट मोचन फाउंडेशन एवं मदर्स फॉर मदर संस्था के संयुक्त तत्वावधान में वाराणसी में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर लोगों को पर्यावरण संरक्षण, हरित क्रांति और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने पौधारोपण कर किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों को देखते हुए आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण में हरियाली बढ़ाना तथा छात्र-छात्राओं को वृक्षों के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष ही पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं और इनके संरक्षण के बिना स्वस्थ भविष्य की कल्पना संभव नहीं है।
अभियान के पहले चरण में अपराह्न 3 बजे नगवा स्थित तुलसी विद्या निकेतन (TVN) परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इसके बाद अपराह्न 3:30 बजे संकट मोचन मंदिर परिसर में औषधीय, छायादार और पारंपरिक महत्व के वृक्षों का रोपण किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. एस.एन. उपाध्याय, प्रो. एन.के. दुबे, अदिति मिश्रा, सुमेधा मिश्रा, एस.एन. श्रीवास्तव सहित अशोक पाण्डेय, राजेश मिश्रा, गोपाल पाण्डेय, विकल्प दुबे, विद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस अवसर पर महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि वर्तमान समय में वृक्षारोपण केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारी जीवनदायिनी माता है और नई पीढ़ी को बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण तथा वृक्षों के महत्व के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में मौजूद पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि आज लगाए गए पौधे भविष्य में शुद्ध वायु, स्वच्छ वातावरण और स्वस्थ जीवन का आधार बनेंगे।
वृहद वृक्षारोपण अभियान के सफल आयोजन के साथ संकट मोचन फाउंडेशन एवं मदर्स फॉर मदर ने समाज को प्रकृति संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। आयोजकों ने इसे हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-सुरक्षित भारत के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।
