वाराणसी। धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ी काशी की प्रसिद्ध पंचक्रोशी यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था देखने को मिल रही है। लगभग 88 किलोमीटर लंबी इस पवित्र परिक्रमा में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। यात्रा के दौरान कंदवा, भीमचंडी, रामेश्वर, कपिलधारा और मणिकर्णिका जैसे प्रमुख पड़ावों पर भक्त विश्राम कर पूजा-अर्चना करते हैं। विशेष रूप से कंदवा स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर को पंचक्रोशी यात्रा का प्रथम और अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि पंचक्रोशी मार्ग की धार्मिक गरिमा और बढ़ती संख्या को देखते हुए मूलभूत सुविधाओं को और बेहतर बनाए जाने की आवश्यकता है। कई यात्रियों ने बताया कि कुछ स्थानों पर अभी भी पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है, जिससे रात्रि विश्राम और आवागमन में परेशानी होती है। वहीं कुछ श्रद्धालुओं ने शौचालय सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कई जगहों पर शौचालय उपयोग के लिए शुल्क लिया जा रहा है, जबकि यात्रियों के लिए निशुल्क और स्वच्छ व्यवस्था होनी चाहिए।
यात्रा में शामिल लोगों ने यह भी बताया कि कई पड़ावों पर प्राथमिक चिकित्सा और दवा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखाई दी। श्रद्धालुओं का मानना है कि इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा में स्वास्थ्य शिविर, पेयजल, मोबाइल शौचालय और प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
हालांकि स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों द्वारा यात्रियों की सहायता के लिए जगह-जगह सेवा शिविर भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर स्थायी सुविधाओं का विस्तार समय की जरूरत है। लोगों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में पंचक्रोशी यात्रा मार्ग को और व्यवस्थित तथा सुविधायुक्त बनाया जाएगा, जिससे काशी की इस प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा का अनुभव श्रद्धालुओं के लिए और सुगम हो सके।
