रिपोर्ट – पवन आजाद

वाराणसी। मणिकर्णिका घाट स्थित चक्रपुष्करणी (मणिकर्णिका कुंड) में मंगलवार, 21 अप्रैल को श्रद्धा और भक्ति का विशेष दृश्य देखने को मिला। मध्याह्न में माँ मणिकर्णिका देवी का विधि-विधान से पूजन किया गया, जिसमें छप्पन भोग, फल और मिष्ठान अर्पित कर भव्य आरती की गई।

प्रधान पुरोहित ने किया प्रथम स्नान, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

पूजन के उपरांत सर्वप्रथम प्रधान पुरोहित जयेन्द्र नाथ दुबे ने कुंड में स्नान किया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और माँ मणिकर्णिका देवी का दर्शन-पूजन किया।

पालकी यात्रा के साथ परंपरा का निर्वहन

स्नान और पूजन के पश्चात पुरोहित परिवार के सदस्यों द्वारा माँ मणिकर्णिका देवी की पालकी को पुनः ब्रह्मनाल स्थित उनके निवास स्थान तक ले जाया गया। यह परंपरा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी विधिवत निभाई गई।

स्नान का विशेष धार्मिक महत्व

मान्यता है कि इस पावन दिन चक्रपुष्करणी कुंड में स्नान करने से चारों धाम की यात्रा के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी स्थान पर भगवान भगवान शिव और माता पार्वती का आगमन हुआ था, जहां माता पार्वती का कुंडल गिर गया था। तभी से यह स्थल शक्तिपीठ के रूप में स्थापित माना जाता है।

अक्षय तृतीया के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने की पुण्य की कामना

अक्षय तृतीया के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने कुंड में स्नान कर अक्षय पुण्य की प्राप्ति की कामना की।

इस संबंध में जानकारी प्रधान पुरोहित जयेन्द्र नाथ दुबे ‘बब्बू महाराज’ द्वारा दी गई।

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