रिपोर्ट- पवन आजाद 

वाराणसी। 15 अप्रैल काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सा लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां पहचान में भ्रम के चलते एक महिला मरीज की गलत विभाग में सर्जरी कर दी गई। इस चूक के बाद उत्पन्न जटिलताओं के कारण 71 वर्षीय महिला की 20 दिन बाद मौत हो गई।

सूत्रों के मुताबिक, “राधिका” नाम की दो महिला मरीज अलग-अलग विभागों—न्यूरोसर्जरी और ऑर्थोपेडिक्स—में भर्ती थीं। 7 मार्च 2026 को न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती 71 वर्षीय मरीज, जिनका रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर का ऑपरेशन होना था, को गलती से ऑर्थोपेडिक्स ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।

बताया जा रहा है कि बिना समुचित पहचान सत्यापन और जांच-पड़ताल के ऑर्थोपेडिक्स टीम ने ऑपरेशन शुरू कर दिया। ऑपरेशन के दौरान संबंधित समस्या नहीं मिलने पर चिकित्सकों को अपनी गलती का अहसास हुआ, जिसके बाद मरीज को तुरंत न्यूरोसर्जरी वार्ड में शिफ्ट किया गया।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत
गलत सर्जरी के बाद मरीज की हालत लगातार खराब होती गई। उसे स्मृति ह्रास, दौरे, जबड़े में जकड़न, मुंह में अल्सर और सांस लेने में दिक्कत जैसी गंभीर समस्याएं हुईं। 27 मार्च 2026 को सांस लेने में गंभीर परेशानी के बाद कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट हुआ और मरीज की मौत हो गई।

परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही, दुर्व्यवहार और समय पर इलाज न देने के आरोप लगाए हैं।

जांच समिति में खामी, नई कमेटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के निदेशक ने पहले तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई थी, लेकिन उसमें एक आरोपी डॉक्टर के शामिल होने की बात सामने आने पर समिति का पुनर्गठन किया गया।

अब नई जांच समिति का नेतृत्व प्रो. अजीत सिंह कर रहे हैं, जो पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगे।

सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठे सवाल
इस घटना के बाद ट्रॉमा सेंटर की कार्यप्रणाली और मरीज सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े हो गए हैं। खासतौर पर—

  • मरीज की पहचान सत्यापन
  • सर्जिकल साइट मार्किंग
  • प्री-ऑपरेटिव चेकलिस्ट
  • विभागों के बीच समन्वय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल व्यक्तिगत गलती नहीं, बल्कि सिस्टम में खामियों का संकेत है।

क्या बोले अधिकारी

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा,
“मामला संज्ञान में आया है। जांच समिति का पुनर्गठन किया गया है। रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।”

आईएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने कहा,
“यह बेहद गंभीर मामला है। प्रो. अजीत सिंह की अध्यक्षता में जांच चल रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

एआई और डिजिटलीकरण पर भी सवाल
गौरतलब है कि पिछले वर्ष ट्रॉमा सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सिस्टम लागू किया गया था, ताकि मरीजों की पहचान और इलाज प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया जा सके। इसके बावजूद ऐसी गंभीर चूक सामने आना अस्पताल प्रशासन पर बड़े सवाल खड़े करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *