रिपोर्ट – पवन आजाद

वाराणसी। माघ मेला प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ हुए व्यवहार और प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस के विरोध में आज वाराणसी में आक्रोश फूट पड़ा। समाजवादी पार्टी और बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने सामने घाट पर गंगा की गोद में उतरकर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।

सनातन परंपराओं पर आघात का आरोप

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य जी को प्रथम गंगा स्नान से रोकना न केवल धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि सनातन परंपराओं पर सीधा आघात है। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जब शंकराचार्य जी ने इस अन्याय के खिलाफ धरना शुरू किया, तो सरकार ने और अधिक दमनात्मक रवैया अपनाते हुए उन्हें मेला क्षेत्र से प्रतिबंधित करने और उनके शिविर की सुविधाएं रोकने का नोटिस जारी कर दिया।

सरकार की कथनी और करनी में अंतर: अमन यादव

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी के महानगर अध्यक्ष अमन यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:

“यह सरकार सनातन धर्म के नाम पर केवल दिखावा करती है। सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु को गंगा स्नान से रोकना और फिर उन्हें नोटिस देकर अपमानित करना पूरी तरह असंवैधानिक और तानाशाही पूर्ण है। योगी सरकार को तत्काल यह नोटिस वापस लेकर शंकराचार्य जी से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।”

प्रमुख उपस्थिति

गंगा तट पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं।

राधेश्याम यादव

बाबू भारती

अमन कुमार

उमेश राजभर

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शंकराचार्य जी के प्रति सरकार का रवैया नहीं बदला, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र होगा। कार्यकर्ताओं ने ‘मां गंगा’ की साक्षी में यह संदेश देने की कोशिश की कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली सत्ता का असली चेहरा अब जनता के सामने उजागर हो चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *