रिपोर्ट – पवन आजाद 

वाराणसी। जिस उम्र में बच्चे ककहरा का ज्ञान सीखते हैं, मोबाइल में कार्टून देखना पसंद करते उस उम्र में वाराणसी का पांच वर्षीय बालक अपनी बहुआयामी प्रतिभा को लेकर चर्चा में है। उसके हाथ पियानो में ऐसे चलते है लगता है कोई अनुभवी बजा रहा हो, ड्रम में जब लैला लैला बजाता है तो लगता है मां सरस्वती की साक्षात कृपा बनी है।त्रिशान्त संगीत के साथ-साथ जूडो कराटे में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे है। इतने कम समय में 7 मेडल जीत अपनी प्रतिभा को भी साबित किया है।

त्रिशान्त पियानो, ड्रम, तबला, कांगो सहित कुल पांच वाद्य यंत्रों पर विभिन्न धुनें बजाता है। पियानो पर वह राष्ट्रगान जन गण मन की धुन प्रस्तुत करता है, जबकि ड्रम पर लोकप्रिय गीतों की धुन निकालने में दक्ष है। इतनी कम उम्र में उसकी संगीत समझ लोगों को हैरान कर रही है।

त्रिशान्त मूल रूप से समस्तीपुर, बिहार का निवासी है। उसके पिता होमी प्रसाद शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्नी मनु शर्मा के साथ वाराणसी में रह रहे हैं। पिता के अनुसार, बचपन से ही त्रिशान्त का रुझान संगीत की ओर दिखाई देने लगा था, जिसके बाद उसे विधिवत संगीत प्रशिक्षण दिलाने की शुरुआत की गई।

त्रिशान्त के पिता बताते हैं कि जब संगीत सीखने के गुरु अजय श्रीवास्तव से बात की गई तो उम्र कम होने के कारण शुरुआत में संदेह था, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान उसकी सीखने की क्षमता देखकर वह प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि त्रिशान्त पिछले डेढ़ वर्ष से नियमित रूप से अभ्यास कर रहा है और कम समय में चीजों को समझ लेता है।

संगीत के साथ-साथ त्रिशान्त कराटे में भी प्रशिक्षण ले रहा है। अब तक वह विभिन्न प्रतियोगिताओं में सात पदक जीत चुका है, जिनमें पांच स्वर्ण पदक शामिल हैं। वह आगामी मार्च माह में ब्लैक बेल्ट की तैयारी कर रहा है। प्रशिक्षकों के अनुसार, सफलता मिलने पर वह देश के सबसे कम उम्र के ब्लैक बेल्ट धारकों में शामिल हो सकता है।

त्रिशान्त की मां मनु शर्मा ने बताया कि बच्चे पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं डाला जाता है। वह अपनी रुचि से संगीत और खेल का अभ्यास करता है। उन्होंने बताया कि त्रिशान्त की दिनचर्या में कराटे प्रशिक्षण, पार्क में शारीरिक अभ्यास, संगीत की शिक्षा और नियमित पढ़ाई शामिल है।

परिजन बताते हैं कि त्रिशान्त शांत, अनुशासित और एकाग्र स्वभाव का बच्चा है। वह खेल, संगीत और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है। त्रिशान्त भविष्य में क्रिकेटर बनना चाहता है और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अपना आदर्श मानता है।

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