रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी | 17 जनवरी,भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) के एनी बेसेंट लेक्चर थिएटर (ABLT) में शुक्रवार को ‘मेड-टेक संवाद’ का भव्य आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय शोध संवाद में चिकित्सा विज्ञान (IMS-BHU) और इंजीनियरिंग (IIT-BHU) के विशेषज्ञों ने एक मंच पर आकर स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक की क्रांतिकारी भूमिका पर गहन विमर्श किया।
महामना को श्रद्धांजलि और विजन पर चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। आईआईटी (बीएचयू) के अधिष्ठाता (आरएंडडी) प्रो. राजेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज की सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए चिकित्सा और उन्नत तकनीक का एकीकरण अनिवार्य हो गया है।
बीएचयू और आईआईटी के बीच मजबूत सहयोग
ऑनलाइन माध्यम से जुड़े काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने दोनों संस्थानों के बीच सुदृढ़ सहयोगात्मक ढांचे की सराहना की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और प्रौद्योगिकी के संयुक्त प्रयास न केवल अकादमिक रूप से समृद्ध हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी इनकी अहम भूमिका है। वहीं, आईएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. सत्य नारायण संखवार ने चिकित्सकों और इंजीनियरों को पूर्ण सहयोग का भरोसा देते हुए किफायती स्वास्थ्य समाधान विकसित करने पर जोर दिया।
डॉ. देवी शेट्टी ने बताया एआई (AI) का महत्व
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी ने ऑनलाइन उद्घाटन व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): निदान और सटीक उपचार में एआई गेम-चेंजर साबित हो रही है।
डिजिटल रिकॉर्ड्स: समयबद्ध और व्यक्तिगत रोगी देखभाल के लिए डिजिटल हेल्थ डेटा आवश्यक है।
भविष्य की राह: मेडिकल टेक्नोलॉजी में नवाचार ही भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का हल है।
चैलेंज ग्रांट की घोषणा
आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस साझेदारी को वैश्विक पहचान दिलाने वाला बताया। उन्होंने चिकित्सा एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोगात्मक प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए विशेष ‘चैलेंज ग्रांट’ की घोषणा भी की।
संवादात्मक सत्र और नवाचार
कार्यक्रम के दौरान एक संवादात्मक सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसमें आईएमएस-बीएचयू के अधिष्ठाता प्रो. संजय गुप्ता और प्रो. गोपाल नाथ सहित अन्य विशेषज्ञों ने भविष्य की दिशाओं पर चर्चा की। कार्यक्रम का समन्वय प्रो. रुचिर गुप्ता ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रदीप पाइक द्वारा दिया गया।
निष्कर्ष: यह ‘मेड-टेक संवाद’ वाराणसी के इन दो शीर्ष संस्थानों की उस साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य नवाचार के माध्यम से मानवता की सेवा करना है।
