कज्जाकपुरा फ्लाईओवर परचाइनीज मांझे में उलझने के बाद अनियंत्रित बाइक दीवार से टकराई, मंडलीय अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
वाराणसी। शहर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जैतपुरा थाना क्षेत्र के कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर मांझे की चपेट में आने से बाइक सवार की दर्दनाक मौत हो गई। मांझा गले में उलझने से उसे गंभीर चोट आई, जिसके बाद बाइक अनियंत्रित होकर फ्लाईओवर की दीवार से टकरा गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस घायल को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा ले गई, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान सुनील कुमार नागपुरी, पुत्र कृष्ण दास नागपुरी, निवासी चौखंभा, थाना चौक, वाराणसी के रूप में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
गले में उलझा मांझा, दीवार से टकराई बाइक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुनील कुमार नागपुरी बाइक से कज्जाकपुरा फ्लाईओवर से गुजर हो रहे थे कि इसी दौरान सड़क पर फैला मांझा अचानक उनके गले में उलझ गया। मांझे से गले में गंभीर चोट लगने के बाद बाइक अनियंत्रित हो गई और फ्लाईओवर की दीवार से जा टकराई। हादसे में बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। जैतपुरा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायल को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा पहुंचाया। हालांकि, चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलने के बाद मृतक के परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई।
प्रतिबंध के बावजूद जानलेवा मांझे का खतरा
कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर हुए इस हादसे ने एक बार फिर प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने की जरूरत को सामने ला दिया है। धारदार मांझा सड़क पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। सड़क या फ्लाईओवर पर फैला मांझा वाहन चालकों के गले में उलझने से जानलेवा साबित हो सकता है।
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ही प्रमुख मार्गों और फ्लाईओवरों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। लोगों को भी पतंगबाजी के दौरान इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मांझा सड़कों और सार्वजनिक रास्तों पर न फैले।
कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक परिवार से उसका अपना छीन लिया। अब सवाल यह है कि प्रतिबंध के बावजूद जानलेवा मांझे के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक कैसे लगेगी, ताकि सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा
सुनिश्चित की जा सके।
