अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में विश्व शांति की प्रार्थना, प्रेम, करुणा और भाईचारे का दिया संदेश
वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर सोमवार को काशी की पावन धरती से विश्व शांति, मानवता, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया गया। श्री काशी विश्वनाथ धाम में भारत माता की प्रतिमा के समक्ष शांति प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस दौरान दुनिया में शांति, अहिंसा और आपसी सद्भाव की स्थापना के लिए प्रार्थना की गई। बाबा विश्वनाथ से युद्ध, हिंसा और अशांति से जूझ रहे विश्व को प्रेम, करुणा और शांति का मार्ग दिखाने की कामना की गई।

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। लोगों ने भारत माता की प्रतिमा के समक्ष ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ सभी के सुखी, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कामना की। कार्यक्रम के दौरान काशी विश्वनाथ धाम से ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश देते हुए पूरी दुनिया में प्रेम, करुणा और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
काशी की धरती से विश्व को शांति का संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि काशी केवल धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी नहीं है, बल्कि यह सदियों से मानवता, सह-अस्तित्व और लोककल्याण का संदेश देने वाली भूमि रही है। बाबा विश्वनाथ की नगरी से निकलने वाला शांति और सद्भाव का संदेश पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष और हिंसा की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। ऐसे समय में मानवता को आपसी विवादों और संघर्ष के बजाय संवाद, सहयोग और करुणा के रास्ते पर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। शांति केवल किसी एक देश, समाज या समुदाय की जरूरत नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता की साझा आवश्यकता है।
भारतीय संस्कृति में शांति और मानव कल्याण की भावना
गंगा सेवक राजेश शुक्ला
ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ में निहित है। भारत की परंपरा हमेशा पूरी मानवता के कल्याण की बात करती रही है। उन्होंने कहा कि काशी की आध्यात्मिक धरती से बाबा विश्वनाथ के धाम के माध्यम से दुनिया को करुणा, संयम, सह-अस्तित्व और भाईचारे का संदेश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की वास्तविक प्रगति शांति और सद्भाव के वातावरण में ही संभव है। युद्ध और हिंसा का सबसे अधिक असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में मानवता को विभाजन और संघर्ष के बजाय संवाद, सहयोग और आपसी समझ को प्राथमिकता देनी चाहिए।
हिंसा के स्थान पर संवाद और करुणा की जरूरत
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज दुनिया के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी सहयोग से निकाला जा सकता है। समाज में शांति स्थापित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर से सकारात्मक भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि प्रेम, करुणा और भाईचारे की भावना को मजबूत करके ही शांतिपूर्ण समाज का निर्माण किया जा सकता है। काशी की परंपरा भी हमेशा मानवता को जोड़ने और सभी के कल्याण की भावना को आगे बढ़ाने की रही है।
विश्व के सुख और सुरक्षित भविष्य की कामना
शांति प्रार्थना के दौरान उपस्थित लोगों ने विश्व के सभी देशों और नागरिकों के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की कामना की। लोगों ने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना की कि दुनिया में युद्ध और हिंसा का अंत हो तथा सभी देश शांति और सद्भाव के साथ आगे बढ़ें।

श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित कार्यक्रम में राजेश शुक्ला, शिवानंद दीक्षित, विश्वनाथ धवन, रेखा दीक्षित, श्रीनिवास, अन्नपूर्णा देवी, विकास कुमार सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। सभी ने विश्व शांति और मानव कल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि काशी की आध्यात्मिक धरती से उठने वाली शांति की आवाज पूरी दुनिया को प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर काशी विश्वनाथ धाम से दिया गया ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश मानवता को एक परिवार मानने की भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास रहा।
