राधारानी का जरीदार वस्त्रों और आभूषणों से हुआ विशेष श्रृंगार, महाअभिषेक और पालना उत्सव में उमड़े श्रद्धालु
वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में शनिवार को श्रीराधाष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। राधारानी के जन्मोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। सुबह से ही मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दिनभर बड़ी संख्या में भक्तों ने राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए। मंदिर परिसर में हरिनाम संकीर्तन, भजन और धार्मिक अनुष्ठानों के चलते पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
राधाष्टमी के विशेष अवसर पर राधारानी का भव्य श्रृंगार किया गया। इसके लिए मथुरा से विशेष रूप से जरीदार वस्त्र मंगाए गए थे। आकर्षक वस्त्रों के साथ राधारानी को आभूषणों से सजाया गया। श्रृंगार के बाद राधारानी का मनमोहक स्वरूप श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। भक्तों ने दर्शन कर पुष्प अर्पित किए और राधारानी से सुख-समृद्धि की कामना की।
सुगंधित फूलों और पवित्र द्रव्यों से हुआ महाअभिषेक
राधाष्टमी के अवसर पर मंदिर में श्रीराधा-कृष्ण का विशेष महाअभिषेक किया गया। सुगंधित फूलों और विभिन्न पवित्र द्रव्यों से विधि-विधान के साथ अभिषेक हुआ। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भजन और संकीर्तन चलता रहा। महाअभिषेक के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु धार्मिक आयोजन में शामिल हुए।

महाअभिषेक के बाद राधारानी का विशेष पूजन किया गया। इसके बाद आरती हुई। भक्तों ने आरती में शामिल होकर पुष्प और भोग अर्पित किए। मंदिर में सुबह से चल रहे धार्मिक कार्यक्रमों के चलते श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।
पालना उत्सव में भक्तों ने झुलाईं राधारानी
राधाष्टमी महोत्सव के दौरान पालना उत्सव भी आयोजित किया गया। फूलों और सजावटी सामग्री से तैयार किए गए पालने में राधारानी को विराजमान कराया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक राधारानी को पालने में झुलाया।
पालना उत्सव के दौरान मंदिर परिसर राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने हरिनाम संकीर्तन में भाग लिया और भजनों पर झूमते नजर आए। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने राधारानी के जन्मोत्सव की खुशी भक्ति और उत्साह के साथ मनाई।
108 प्रकार के व्यंजनों का लगाया गया भोग
राधाष्टमी के मौके पर श्रीराधा-कृष्ण को 108 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। अलग-अलग तरह के पकवानों को विशेष रूप से तैयार कर आकर्षक ढंग से सजाया गया और भगवान को अर्पित किया गया। भोग के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए प्रसाद की व्यवस्था भी की गई थी। श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया। 108 व्यंजनों का भोग राधाष्टमी महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा।
दिनभर गूंजता रहा हरिनाम संकीर्तन
राधाष्टमी के अवसर पर इस्कॉन मंदिर में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण के जयकारों के साथ भक्तिमय संगीत की गूंज बनी रही।

मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजन की विशेष व्यवस्था की गई थी। सुबह से ही श्रद्धालु कतार में लगकर राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करते रहे। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बनी रही।
राधारानी प्रेम और भक्ति का स्वरूप : अच्युत मोहन दास
इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष अच्युत मोहन दास ने कहा कि श्रीराधारानी भगवान श्रीकृष्ण की आनंददायिनी शक्ति और प्रेम-भक्ति का स्वरूप हैं। राधाष्टमी का पर्व भक्तों के लिए राधारानी के चरणों में शरणागति और भक्ति की भावना को मजबूत करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि राधारानी की भक्ति के माध्यम से भक्त भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना को और गहरा कर सकते हैं। राधाष्टमी का यह पर्व भक्तों को प्रेम और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है

वाराणसी के अन्य मंदिरों में भी हुए आयोजन
राधाष्टमी के अवसर पर वाराणसी के अन्य कृष्ण मंदिरों, मठों और आश्रमों में भी विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। मंदिरों में राधारानी की झांकियां सजाई गईं और विशेष श्रृंगार किया गया। कई स्थानों पर पालना उत्सव आयोजित हुआ। दिनभर भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन के कार्यक्रम चलते रहे।
दुर्गाकुंड स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित राधाष्टमी महोत्सव के समापन के बाद श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरित किया गया। आयोजन में साक्षी मुरारी दास, रसिक गोविंद दास, रामकेशव दास, मुरारी गुप्त दास समेत बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
