सूर्य षष्ठी

संतान की कामना लेकर काशी पहुंच रहे दंपती, मनोकामना पूरी होने पर बच्चों का मुंडन और हलवा-पूरी चढ़ाने की परंपरा

रिपोर्ट / ओमकार नाथ

वाराणसी। काशी के अस्सी क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध लोलार्क कुंड पर सूर्य षष्ठी पर्व से पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है। 17 सितंबर को होने वाले सूर्य षष्ठी पर्व को लेकर मंगलवार से ही लोलार्क कुंड परिसर में दूर-दराज से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। कुंड के आसपास प्रशासन की ओर से की गई बैरिकेडिंग में श्रद्धालु अपनी जगह सुरक्षित करते नजर आए। कई लोग बैरिकेडिंग के भीतर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

लोलार्क कुंड का धार्मिक महत्व पूरे वर्ष बना रहता है, लेकिन सूर्य षष्ठी के अवसर पर यहां होने वाले स्नान और बाबा लोलार्केश्वर के दर्शन-पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इसी आस्था के चलते पर्व से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को कुंड परिसर में महिलाओं की संख्या भी काफी रही। कई श्रद्धालुओं ने कुंड में स्नान किया और इसके बाद बाबा लोलार्केश्वर के मंदिर में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

सूर्य षष्ठी

संतान की कामना लेकर पहुंच रहे दंपती

लोलार्क कुंड से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण सूर्य षष्ठी के अवसर पर यहां संतान की कामना लेकर बड़ी संख्या में दंपती पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि लोलार्क कुंड में श्रद्धा के साथ स्नान करने और बाबा लोलार्केश्वर की पूजा करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि सूर्य षष्ठी से दो दिन पहले ही ऐसे श्रद्धालु भी कुंड पर पहुंचने लगे हैं, जिनकी मनोकामना पहले पूरी हो चुकी है।

मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा लोलार्क कुंड पहुंचकर बाबा लोलार्केश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। कई परिवार अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराते हैं। वहीं कुछ श्रद्धालु बाबा को हलवा-पूरी का भोग चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं। मंगलवार को भी कई परिवार अपने बच्चों के साथ लोलार्क कुंड पहुंचे और पूजा-अर्चना कर अपनी आस्था व्यक्त की।सूर्य षष्ठी

 

मनोकामना पूरी होने के बाद बच्चों के साथ पहुंचते हैं परिवार

लोलार्क कुंड के प्रधान पुजारी के अनुसार यहां स्नान करने के बाद संतान प्राप्ति की मान्यता काफी पुरानी है। इसी आस्था के चलते सूर्य षष्ठी के दिन बड़ी संख्या में दंपती संतान की कामना लेकर लोलार्क कुंड पहुंचते हैं। जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे बाद में अपने बच्चों के साथ लोलार्केश्वर महादेव के दर्शन करने आते हैं।

उन्होंने बताया कि कुंड में स्नान के दौरान श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार एक फल कुंड में छोड़ते हैं। मान्यता है कि जब तक संतान की प्राप्ति नहीं हो जाती, तब तक उस फल का सेवन नहीं किया जाता। इस धार्मिक मान्यता के चलते भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु लोलार्क कुंड में स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

बैरिकेडिंग में अभी से जगह बना रहे श्रद्धालु

सूर्य षष्ठी के दिन लोलार्क कुंड पर होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से पहले से ही बैरिकेडिंग की गई है। पर्व से पहले ही श्रद्धालु बैरिकेडिंग वाले स्थानों पर पहुंचकर अपनी जगह सुनिश्चित करने लगे हैं। कई श्रद्धालु वहीं बैठकर पर्व के दिन अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि सूर्य षष्ठी के दिन लोलार्क कुंड पर इतनी अधिक भीड़ होती है कि पहले से पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार करना बेहतर रहता है। इसी वजह से लोग दो दिन पहले ही यहां पहुंचने लगे हैं। कुंड परिसर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

सूर्य षष्ठी

किसी ने मांगी संतान, किसी ने चढ़ाया प्रसाद

लोलार्क कुंड पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आस्था के अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। कोई दंपती संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां पहुंच रहा है तो कोई मनोकामना पूरी होने के बाद बाबा लोलार्केश्वर का आशीर्वाद लेने आया है। कई परिवार अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने के लिए पहुंचे हैं।

वहीं कुछ श्रद्धालु हलवा-पूरी का प्रसाद तैयार कराकर बाबा लोलार्केश्वर को भोग अर्पित कर रहे हैं। पूजा-अर्चना के बाद परिवार अपने बच्चों के साथ कुंड परिसर में धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आए। इससे लोलार्क कुंड परिसर में पर्व से पहले ही धार्मिक माहौल बनने लगा है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

सूर्य षष्ठी के अवसर पर लोलार्क कुंड में होने वाले स्नान का धार्मिक महत्व काशी के साथ देश के दूसरे हिस्सों में भी माना जाता है। पर्व के अवसर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु वाराणसी पहुंचते हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से विदेशों से भी श्रद्धालुओं के आने की बात बताई जाती है।

लोलार्क कुंड

सूर्य षष्ठी के दिन लोलार्क कुंड और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। श्रद्धालु कुंड में स्नान करने के बाद बाबा लोलार्केश्वर का दर्शन-पूजन करते हैं। संतान की कामना रखने वाले दंपती अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं, जबकि मनोकामना पूरी होने के बाद कई परिवार दोबारा बच्चों के साथ यहां आते हैं।

पर्व के पहले ही दिखने लगी आस्था की तस्वीर

सूर्य षष्ठी पर्व में अभी दो दिन बाकी हैं, लेकिन लोलार्क कुंड पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ ने पर्व की तैयारियों और श्रद्धालुओं की आस्था की तस्वीर साफ कर दी है। मंगलवार से ही बैरिकेडिंग में लोगों के पहुंचने और अपनी बारी का इंतजार करने का सिलसिला शुरू हो गया। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

17 सितंबर को सूर्य षष्ठी के अवसर पर लोलार्क कुंड में स्नान और बाबा लोलार्केश्वर के दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। संतान की कामना, मनोकामना पूरी होने के बाद मुंडन संस्कार और हलवा-पूरी का भोग चढ़ाने की परंपरा के चलते इस पर्व का काशी में विशेष धार्मिक महत्व बना हुआ है।

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