छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर जताई आपत्ति, कॉपियों और आर्टवर्क की पुनः जांच के साथ पारदर्शी व्यवस्था की मांग

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) के छात्र-छात्राओं ने प्रैक्टिकल परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर मंगलवार को केंद्रीय कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने प्रैक्टिकल में मिले अंकों को लेकर सवाल उठाते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर आपत्ति जताई। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पोस्टर और बैनर लेकर विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे और अपनी मांगों को आवाज उठाई।

BHU BFA छात्रों का प्रदर्शन

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि  वर्ष 2026 में प्रैक्टिकल परीक्षा में कई छात्रों के अंकों में पिछले साल के मुकाबले काफी अंतर देखने को मिला है। छात्रों के अनुसार, जिन विद्यार्थियों ने पिछली परीक्षा में 350 से 365 तक अंक हासिल किए थे, उन्हें इस बार लगभग 215 से 240 अंक के बीच अंक दिए गए हैं। विद्यार्थियों ने कहा कि अंकों में अचानक आई इस गिरावट को लेकर उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई है।

अंकों में अंतर को लेकर छात्रों ने उठाए सवाल

छात्रों का कहना है कि BFA जैसे पाठ्यक्रम में प्रैक्टिकल परीक्षा का परिणाम काफी महत्वपूर्ण होता है। इसमें विद्यार्थियों की कलात्मक क्षमता, तकनीकी दक्षता और तैयार किए गए आर्टवर्क के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। ऐसे में अंक निर्धारित करने की प्रक्रिया स्पष्ट और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

प्रदर्शन में शामिल छात्रा नसी चंद ने दावा किया कि पिछले वर्ष उन्हें प्रैक्टिकल परीक्षा में 350 अंक प्राप्त हुए थे, जबकि इस बार उनका स्कोर घटकर 215 रह गया। छात्रा ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कौन सा आधार रहा, जिसके चलते उनके अंकों में इतनी बड़ी कमी हुई। उनका कहना है कि उन्होंने इस वर्ष भी परीक्षा की तैयारी पूरी मेहनत के साथ की थी।

इसी तरह एक अन्य विद्यार्थी ने बताया कि उसे पिछले वर्ष प्रैक्टिकल में 365 अंक मिले थे, जबकि इस बार करीब 240 अंक प्राप्त हुए हैं। छात्रों ने कहा कि उनके पास पिछले वर्ष और इस वर्ष बनाए गए आर्टवर्क भी मौजूद हैं। प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने अपने कार्यों को दिखाते हुए मूल्यांकन में सामने आए अंतर पर स्पष्टीकरण मांगा।

BHU BFA छात्रों का प्रदर्शन

मूल्यांकन के मानकों की जानकारी देने की मांग

विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि 400 अंकों के प्रैक्टिकल में मूल्यांकन के लिए अपनाए गए मानकों को सार्वजनिक किया जाए। छात्रों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके आर्टवर्क और प्रदर्शन का आकलन किन बिंदुओं के आधार पर किया गया है।

छात्रों के मुताबिक यदि किसी विद्यार्थी के कार्य में कमी पाई गई है तो उसे संबंधित कमियों के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके अंक किस आधार पर तय किए गए। छात्रों ने कहा कि पारदर्शी प्रक्रिया से ही मूल्यांकन को लेकर पैदा हुई शंकाओं को दूर किया जा सकता है।

केंद्रीय कार्यालय के बाहर लगाया धरना

अपनी मांगों को लेकर BFA के छात्र-छात्राओं ने BHU केंद्रीय कार्यालय के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों के हाथों में अलग-अलग संदेश लिखे पोस्टर दिखाई दिए। छात्रों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे भी लगाए और विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की अपील की।

प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के प्राक्टोरियल बोर्ड की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी शिकायतों को सुना। इस दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को अधिकारियों के सामने रखा और विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात कराने की मांग की।

तीन प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन

BFA छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने मुख्य रूप से तीन मांगें रखीं। विद्यार्थियों की पहली मांग है कि प्रैक्टिकल परीक्षा की कॉपियों और तैयार किए गए आर्टवर्क का दोबारा मूल्यांकन कराया जाए। उनका कहना है कि पुनर्मूल्यांकन से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और विद्यार्थियों की शिकायतों का समाधान संभव होगा।

दूसरी मांग के तहत छात्रों ने कहा कि जब तक री-चेकिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक फीस भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया को रोकने पर विचार किया जाए। विद्यार्थियों की तीसरी प्रमुख मांग है कि 400 अंकों के प्रैक्टिकल में मूल्यांकन के स्पष्ट नियम और अंक देने की प्रक्रिया छात्रों के सामने रखी जाए।

छात्रों ने कहा- सिर्फ अंक बढ़ाने की मांग नहीं

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल अपने अंक बढ़वाना नहीं है। उनका कहना है कि वे यह चाहते हैं कि मूल्यांकन की प्रक्रिया निष्पक्ष, स्पष्ट और पारदर्शी हो। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार मूल्यांकन तय नियमों और मानकों के आधार पर किया गया है, तो छात्रों को उसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

छात्रों का कहना है कि प्रैक्टिकल के अंक उनके अंतिम शैक्षणिक परिणाम पर प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षा और भविष्य के करियर के अवसरों में भी इन अंकों की भूमिका हो सकती है। ऐसे में मूल्यांकन से जुड़ी किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।

विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर उनकी आपत्तियों का समाधान करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि उन्हें विश्वविद्यालय की ओर से स्पष्ट जवाब मिलने की उम्मीद है। फिलहाल प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचाई हैं और मामले के शीघ्र निस्तारण की मांग की है।

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