रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। अस्सी घाट की गंगा आरती व्यवस्था को अब श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के अधीन लाने की तैयारी तेज हो गई है। नमो और ललिता घाट की तर्ज पर यहां भी वैतनिक अर्चकों से आरती कराने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही शाम को होने वाली दो अलग-अलग गंगा आरतियों को एक में समाहित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
इस संबंध में भेलूपुर एसीपी कार्यालय में जिला प्रशासन और आरती समितियों के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों ने मंदिर प्रशासन से टेलिफोनिक वार्ता कर प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
बैठक में क्या हुआ तय
बैठक में यह सहमति बनी कि वर्तमान में जो अर्चक आरती कर रहे हैं, वही आगे भी आरती कराएंगे, लेकिन उन्हें मंदिर प्रशासन की ओर से मासिक वेतन दिया जाएगा। साथ ही पूरी आरती व्यवस्था, प्रबंधन और अनुशासन की जिम्मेदारी मंदिर प्रशासन के अधीन होगी।
अधिकारियों का मानना है कि इससे आरती की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सकेगी तथा श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल पाएगी।

आरती समितियों ने फिलहाल प्रस्ताव ठुकराया
हालांकि, आरती समितियों ने इस प्रस्ताव को तत्काल स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई लिखित प्रस्ताव नहीं दिया गया है, इसलिए केवल मौखिक बातचीत के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
समितियों के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों और सुझावों को नजरअंदाज किया गया, तो वे इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखेंगे।
‘सुबह ए बनारस’ संचालक बैठक से रहे अनुपस्थित
बैठक में ‘सुबह ए बनारस’ कार्यक्रम के संचालक शामिल नहीं हुए, जिससे इस मुद्दे पर सभी पक्षों की एक साथ सहमति नहीं बन सकी। वर्तमान में अस्सी घाट पर सुबह ‘सुबह ए बनारस’ के तहत आरती आयोजित होती है, जबकि शाम को गंगा सेवा समिति और जाह्नवी गंगा सेवा समिति द्वारा दो अलग-अलग आरतियां कराई जाती हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद तेज हुई कार्रवाई
हाल ही में ‘सुबह ए बनारस’ कार्यक्रम के दौरान पैसे लेकर आरती दिखाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस घटना के बाद प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव की पहल तेज कर दी है।
प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गंगा आरती के नाम पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं से कथित तौर पर अवैध वसूली की जाती है। घाट, नाव और कुर्सियों पर बैठाने के नाम पर भी अधिक रकम लेने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा होती है।
प्रशासन का उद्देश्य—पारदर्शी और व्यवस्थित व्यवस्था
एडीएम सिटी आलोक वर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है और सभी पक्षों से बातचीत जारी है। वहीं एसीपी भेलूपुर ने स्पष्ट किया कि घाट पर दुर्व्यवहार, अवैध वसूली और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य गंगा आरती व्यवस्था को पारदर्शी, अनुशासित और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित बनाना है, ताकि धार्मिक आस्था के इस महत्वपूर्ण आयोजन की गरिमा बनी रहे।
