BHU में 30 अक्टूबर से जेंडर पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, 150 से अधिक शोध-पत्र होंगे प्रस्तुत, पद्मश्री निवेदिता भिड़े और पद्मभूषण प्रो. कपिल कपूर उद्घाटन सत्र में रहेंगे मौजूद
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में जेंडर के भारतीय एवं विऔपनिवेशिक दृष्टिकोणों पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। सामाजिक विज्ञान संकाय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से 30 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाली इस संगोष्ठी का विषय ‘Gender in Flux: A Sociological Examination of Evolution, Intersectionality, and New Horizons in India’ रखा गया है। इसमें छह देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और 150 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय सामाजिक परिस्थितियों, ऐतिहासिक अनुभवों, सांस्कृतिक परंपराओं और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संदर्भ में जेंडर से जुड़े विषयों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है। इसके साथ ही जेंडर अध्ययन में प्रचलित सैद्धांतिक दृष्टिकोणों की समीक्षा और भारतीय संदर्भों पर आधारित नए विचारों को विकसित करने पर चर्चा होगी।
भारतीय संदर्भों में जेंडर अध्ययन पर होगा विमर्श
समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. श्वेता प्रसाद इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजक हैं। उनके संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से जेंडर के समाजशास्त्र में भारतीय दृष्टिकोणों को मजबूत करने और समकालीन अकादमिक बहसों का आलोचनात्मक परीक्षण करने का प्रयास किया जाएगा।

संगोष्ठी में इस बात पर चर्चा होगी कि जेंडर को समझने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई सैद्धांतिक ढांचे यूरो-अमेरिकी बौद्धिक परंपराओं से प्रभावित रहे हैं। ऐसे में भारतीय समाज की विविधता, ऐतिहासिक अनुभवों और सामाजिक वास्तविकताओं के आधार पर इन ढांचों की उपयोगिता और सीमाओं को समझना महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, औपनिवेशिक शासन के दौरान जेंडर और लैंगिकता से जुड़ी धारणाओं में आए बदलावों तथा सामाजिक संस्थाओं, कानून और दैनिक जीवन पर उनके प्रभावों का भी अध्ययन किया जाएगा। जाति, वर्ग, धर्म, क्षेत्र, नातेदारी और सत्ता संबंधों के साथ जेंडर के अंतर्संबंधों पर भी विचार-विमर्श होगा।

उद्घाटन सत्र में पद्मश्री निवेदिता भिड़े होंगी मुख्य वक्ता
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में पद्मश्री निवेदिता भिड़े मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखेंगी। पद्मभूषण प्रो. कपिल कपूर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता BHU के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी करेंगे। इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. ए. के. उपाध्याय भी उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम के दौरान जेंडर अध्ययन, भारतीय बौद्धिक परंपराओं और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही जेंडर के अध्ययन में नई सैद्धांतिक दृष्टियों और शोध की संभावनाओं पर भी विचार होगा।

समापन सत्र में अंतरराष्ट्रीय समाजशास्त्रीय संघ की उपाध्यक्ष देंगी व्याख्यान
संगोष्ठी के समापन सत्र में अंतरराष्ट्रीय समाजशास्त्रीय संघ की उपाध्यक्ष और कनेक्टिकट विश्वविद्यालय की प्रोफेसर बंदना पुरकायस्थ समापन व्याख्यान देंगी। टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस), मुंबई के कुलपति प्रो. बद्रीनारायण विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। सत्र की अध्यक्षता भारतीय समाजशास्त्रीय परिषद के अध्यक्ष प्रो. डी. आर. साहू करेंगे।

समापन सत्र में संगोष्ठी के अकादमिक योगदानों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही जेंडर अध्ययन के क्षेत्र में भविष्य के अनुसंधान, शैक्षणिक सहयोग और ज्ञान के विकास की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
तीन पूर्ण सत्रों में शोध और सामाजिक न्याय पर चर्चा
संगोष्ठी के अकादमिक कार्यक्रम में तीन पूर्ण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें दो राष्ट्रीय और एक अंतरराष्ट्रीय सत्र होगा। इनमें भारत में जेंडर अध्ययन और नारीवादी चिंतन का विकास, अंतर्संबंधता, सामाजिक न्याय, समकालीन लैंगिक चुनौतियां, स्वदेशी ज्ञान परंपराएं और शोध एवं नीति की नई दिशाएं प्रमुख विषय होंगे।

छह देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से विभिन्न सामाजिक और अकादमिक दृष्टिकोणों को साझा करने का अवसर मिलेगा। आयोजन के माध्यम से तुलनात्मक शोध और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
संगोष्ठी में नए वैचारिक दृष्टिकोण विकसित करने, स्थानीय और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का दस्तावेजीकरण करने तथा शोध से प्राप्त निष्कर्षों को पाठ्यक्रम निर्माण, सार्वजनिक नीति और सामाजिक हस्तक्षेपों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
यह आयोजन जेंडर के अध्ययन को विकास, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय परिवर्तन, सांस्कृतिक पहचान और संस्थागत बदलाव जैसे व्यापक विषयों से जोड़ते हुए भारतीय अनुभवों और वैश्विक अकादमिक विमर्श के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास करेगा।
