ताज महोत्सव, महाकुंभ और हुनर हाट जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर कर चुकी हैं प्रस्तुति, गायिका अब लोक संगीत के जरिए पूर्वी यूपी की संस्कृति को देंगी नई पहचान

वाराणसी। संगीत, कला और साहित्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकीं प्रसिद्ध गायिका निशी सिंह अब लोक संगीत की दुनिया में कदम रखने जा रही हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति और मिट्टी की खुशबू से जुड़ा उनका नया लोकगीत ‘लागा का मोरा मनवा’ जल्द ही देश के प्रतिष्ठित म्यूजिक लेबल टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले रिलीज होगा। इस गीत के माध्यम से निशी सिंह पूर्वांचल की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संगीत के जरिए श्रोताओं तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। रविवार को वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित एकेएस पैलेस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने नए लोकगीत की जानकारी दी। निशी सिंह अपने इस गीत की सफलता के लिए बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करने और उनका आशीर्वाद लेने काशी पहुंची थीं।

 टी-सीरीज के साथ पहले भी कर चुकी हैं काम

निशी सिंह एक स्थापित प्लेबैक और स्टेज सिंगर के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। वह इससे पहले भी टी-सीरीज के साथ कई गानों में काम कर चुकी हैं। उनके हिंदी-पंजाबी गीत ‘सोणिया मन मोणिया’ को श्रोताओं का अच्छा प्रतिसाद मिला था। वहीं, प्रसिद्ध अभिनेता मनीष पॉल के अभिनय से सजे उनके दर्द भरे गीत ‘दर्द कितना है’ को भी काफी लोकप्रियता मिली थी।

निशी सिंहलागा का मोरा मनवा
गायिका निशी सिंह

अब तक हिंदी-पंजाबी गीतों, गजल, सूफी संगीत और भक्ति संगीत में अपनी गायकी का हुनर दिखाने वाली निशी सिंह पहली बार लोक संगीत की विधा में कदम रखने जा रही हैं। उनका नया गीत ‘लागा का मोरा मनवा’ पूर्वी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और लोक संगीत की परंपरा से जुड़ा है। टी-सीरीज जैसे बड़े म्यूजिक लेबल से इस गीत का रिलीज होना उनके संगीत सफर में एक नया पड़ाव माना जा रहा है।

ताज महोत्सव से महाकुंभ तक बिखेर चुकी हैं आवाज का जादू

निशी सिंह देश के कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मंचों पर अपनी गायकी प्रस्तुत कर चुकी हैं। आगरा के प्रसिद्ध ताज महोत्सव में वह लगातार चार से पांच बार अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। इसके अलावा प्रयागराज महाकुंभ के मुख्य गंगा मंच पर भी उन्होंने भक्ति संगीत और भजनों की प्रस्तुति दी, जिसे श्रोताओं ने सराहा।

निशी सिंह
लागा का मोरा मनवा

उनकी प्रस्तुतियों में भक्ति संगीत के साथ-साथ गजल, सूफी और पारंपरिक रचनाओं की भी झलक देखने को मिलती है। निशी सिंह अर्धकुंभ, अलीगढ़ महोत्सव, चंडीगढ़ रोज फेस्टिवल, रामपुर हुनर हाट और दमन-दीव बीच फेस्टिवल जैसे आयोजनों में भी अपनी गायकी का प्रदर्शन कर चुकी हैं। दिल्ली के प्रसिद्ध साहित्यिक उत्सव ‘जश्न-ए-अदब’ में भी उन्होंने अपनी प्रस्तुति दी है।

विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर लगातार प्रस्तुतियां देने के चलते निशी सिंह ने संगीत प्रेमियों के बीच अपनी पहचान बनाई है। उनकी गायकी में अलग-अलग संगीत विधाओं का समावेश देखने को मिलता है। अब लोक संगीत के जरिए वह अपनी कला के एक नए पक्ष को श्रोताओं के सामने लाने जा रही हैं।

गायिकी के साथ चित्रकारी और कविता में भी रुचि

निशी सिंह की पहचान केवल गायिका के रूप में ही सीमित नहीं है। वह चित्रकार, कवयित्री और समाजसेविका के तौर पर भी सक्रिय हैं। संगीत और कला के साथ उनका जुड़ाव सामाजिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों तक फैला हुआ है। उनका मानना है कि कला और संगीत समाज को जोड़ने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से परिचित कराने का सशक्त माध्यम हैं।

इसी उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2008 में नाद फाउंडेशन की स्थापना की थी। इस संस्था के माध्यम से वह संगीत, नाटक, गजल कॉन्सर्ट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रही हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति का संरक्षण करना तथा युवा पीढ़ी को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

निशी सिंह
लागा का मोरा मनवा

निशी सिंह का प्रयास रहा है कि पारंपरिक कलाओं और संगीत की विभिन्न विधाओं को मंच मिले, जिससे कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके। नाद फाउंडेशन के माध्यम से वह सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।

शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ाव

संगीत और सामाजिक कार्यों के अलावा निशी सिंह शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वह प्रतिष्ठित प्रूडेंस स्कूल ग्रुप के प्रबंधन से जुड़ी हैं। इसके साथ ही वह सांस्कृतिक संस्था संस्कार भारती में भी योगदान दे रही हैं। कला, शिक्षा और समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है।

संगीत, कला और सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए निशी सिंह को समय-समय पर कई राष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है। वह सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और कला के माध्यम से समाज को जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं।

 लोक संगीत से जुड़कर पूर्वांचल की विरासत को बढ़ावा देने की पहल

निशी सिंह का नया लोकगीत ‘लागा का मोरा मनवा’ उनके संगीत सफर में एक नई शुरुआत है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक परंपराओं से जुड़ा यह गीत क्षेत्रीय संगीत को व्यापक मंच तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। टी-सीरीज के बैनर तले गीत के रिलीज होने से इसे देशभर के श्रोताओं तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

लोक संगीत किसी भी क्षेत्र की भाषा, परंपरा, जीवनशैली और भावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम होता है। ऐसे में निशी सिंह ने लोक संगीत की ओर रुख करना उनके अब तक के संगीत सफर में एक नया आयाम जोड़ता है। अब श्रोताओं को उनके नए गीत के रिलीज होने का इंतजार है, जिसके जरिए पूर्वांचल की लोक संस्कृति की झलक संगीत के रूप में सामने आएगी।

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